गिरा हूँ मैं उठ कर, मैं गिर कर उठा हूँ !
इसीलिए तो यारों मैं जिंदा यहाँ हूँ !
रास्ते हैं ही कम, उनमें पत्थर बहुत हैं !
उन्ही से तो ठोकर मैं खाया यहाँ हूँ !!
हँसते हो तुम, पर मैं रोता यहाँ हूँ !
लड़ते हो तुम, पर मैं सहता यहाँ हूँ !
फूल हैं कम, यहाँ कांटे बहुत हैं !
उन्ही से तो ज़ख़्मी में हुआ यहाँ हूँ !!
मत सुनो तुम, पर मैं सुनता सारा जहाँ हूँ !
जिसे कोई ना समझे, उसे में समझता हूँ !
देखा है मैंने, लोग रोते बहुत हैं !
उन्ही को तो चुप मैं करता यहाँ हूँ !!
ना देखा किसी ने, मैं रहता वहां हूँ !
उसी को बताने, मैं कहता यहाँ हूँ !
इसी को दिखाने, मैं लिखता यहाँ हूँ !
इसीलिए तो यारो मैं जिंदा यहाँ हूँ !!